कबीरपंथ, धनी धर्मदास वंश परंपरा और एसकेडीवी मिशन : एक विस्तृत परिचय
भारत संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि रहा है। इसी भूमि पर अनेक महान संतों ने जन्म लेकर मानवता को सत्य, प्रेम, समानता और आध्यात्मिक जागरण का संदेश दिया। इन्हीं महान संतों में एक नाम है सतगुरु श्री कबीर साहब का। संत कबीर साहब ने समाज में फैले अंधविश्वास, जात-पात, ऊँच-नीच और बाहरी आडंबरों का विरोध करते हुए सच्चे नाम, सद्गुरु और मानवता का मार्ग बताया। आज कबीरपंथ केवल एक धार्मिक पंथ नहीं बल्कि एक विशाल आध्यात्मिक और सामाजिक आंदोलन के रूप में स्थापित है, जिसके अनुयायी भारत सहित अनेक देशों में मौजूद हैं। कबीरपंथ की परंपरा में सतगुरु कबीर साहब के परम शिष्य धनी धर्मदास साहब का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। कबीरपंथ की मान्यता के अनुसार स्वयं कबीर साहब ने धनी धर्मदास साहब को “अटल 42 वंश” का आशीर्वाद प्रदान किया था। कबीर साहब का प्रसिद्ध वचन है: “चार गुरु संसार में, धर्मदास बड़े अंश। मुक्तिराज इनको दिया, अटल बयालीस वंश॥” कबीरपंथियों की मान्यता है कि धनी धर्मदास साहब की वंश परंपरा के माध्यम से सद्गुरु परंपरा और सतनाम की धारा निरंतर आगे बढ़ती रहेगी। इसी वंश परंपरा में वर्तमान समय में हुज...








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